सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहने वाले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन अक्सर अपने कुछ पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ जाते हैं। कभी किसी की कविता किसी के नाम तो कभी फर्जी जानकारियों वाले पोस्ट शेयर कर देते हैं। ऐसा करने के बाद जब उन्हें ट्रोल किया जाता है फिर माफी भी मांग लेते हैं। ऐसा ही कुछ उनकी ताजा पोस्ट पर हुआ है।

दरअसल अमिताभ बच्चन ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट साझा किया है जिसमें उर्दू के दो शेर फरमाए गए हैं। एक शेर मिर्जा गालिब के नाम की है तो दूसरी इकबाल के नाम की। हालांकि दोनों शायरों ने ऐसा कुछ लिखा ही नहीं है। पोस्ट में दिख रहे चलताऊ शेर को उर्दू के इन महान शायरों के नाम पर चिपका दिए गए हैं, जिसको लेकर बिग बी को लोग काफी खरी-खोटी सुना रहे हैं।

अनारकली ऑफ आरा फिल्म से बॉलीवुड में कदम रखने वाले फिल्ममेकर अविनाश दास ने अमिताभ बच्चन के इस पोस्ट को लेकर अपनी राय दी है। अविनाश दास ने बिग बी के पोस्ट को साझा करते हुए लिखा- सर, आपने जो ये दो शेर दो शायरों के नाम से चिपकाये हैं, वो फ़र्ज़ी शेर हैं। इन दोनों शायरों ने कभी इतने ख़राब शेर नहीं कहे। लगता है आजकल आप भी वॉट्सएप यूनिवर्सिटी से जुड़ गये हैं और साहित्य और इतिहास के कचरे को प्रचारित-प्रसारित करने लगे हैं! 

इसके साथ ही लखनऊ के किस्सागो और लेखक हिमांशु बाजेपेयी ने अमिताभ बच्चन को अपने पिता की एक कविता को पढ़ने की सलाह दी जिसे उन्होंने ग़ालिब  की तारीफ में लिखी थी। हिमांशु बाजेपीय ने कमेंट किया-आपके बाबू जी के नाम पे कोई घटिया कविता चिपकाए जो बाबू जी की हो ही ना, तो आपको बहुत बुरा लगेगा, फिर ग़ालिब जैसे महान शायर के साथ ये टुच्ची शायरी क्यों चिपका रहे हैं ? आपके बाबू जी ने ग़ालिब की तारीफ में एक लंबी कविता लिखी है, रचनावली में मिल जाएगी। उसे पढ़िए और समझिए कि ग़ालिब कितना बड़ा शायर था, ऐसी टेम्पो छाप शायरी उसके नाम पे न चिपकाइये। इसके साथ ही हिमांशु ने बिग बी पर एकतरफा संवाद करने जैसी बात कही। लिखा-एकतरफा संवाद है इनका। फीडबैक पर कोई तवज्जो नहीं। जिससे पोस्ट करवाते हैं उसके पास कॉमन सेंस नहीं।

बाबुशा कोहली नाम के यूजर ने अमिताभ पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा- ये क्या ऊल जलूल लिखे जा रहे हैं आप ग़ालिब और इक़बाल के नाम पर? कुछ अंदाज़ा भी है आपको उनके मेआर का? अरे भाई ! बाज़ आइए इस हरकत से। एक ने मजाकिया अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए लिखा- मत कर उम्मीद पेट्रोल प्राइस के ट्वीट्स की मेरे से ग़ालिब ।जब सरकार बदलेगी तब वो लौट आएँगे।

एक यूजर ने लिखा- आदरणीय, आप से यह उम्मीद नहीं थी। आप साहित्यिक परिवार से हैं। आप को हम साहित्य का ज्ञाता मानते हैं। आप से यह आशा थी कि आप ट्रक के पीछे लिखे जाने वाले शेरों को ग़ालिब या इक़बाल के नाम से जोड़ने वालों को तोड़ने निकलेंगे। इस प्रकार की टुच्ची शायरी को नंगा करेगें लेकिन आप तो जाहिलों के ही साथ सफ़र पर निकल गए। सर जिस को भी आप ने अपने सोशल मीडिया हैंडल का ठेका दिया है उसे तुरंत निकाल बाहर करें और अगर आप ने ख़ुद ऐसा किया है तो आप इसी समय ग़ालिब और इक़बाल का संग्रह मंगा कर पढ़ना शुरु करें।

यूजर ने आगे लिखा- साथ ही एक और पोस्ट में अपनी भूल को सुधारें। क्योंकि आप का लिखा दूर दूर तक जाता है। आप की परोसी जिहालत सोचिए कहां तक गई होगी। अगर आप ऐसा करेंगे तो बाबूजी की आत्मा को शांति मिलेगी।

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