नई दिल्ली. पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है. एसोसिएशन की शीर्ष परिषद ने एक दिन पहले ही अजहरुद्दीन को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इसमें लिखा था कि जब तक उनके खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़ी जांच पूरी नहीं हो जाती, वो तब तक निलंबित रहेंगे. साथ ही उनकी सदस्यता भी रद्द हो गई है. नोटिस में उन पर मनमाने फैसले लेने, हितों के टकराव से जुड़ी जानकारी न देने और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं.

नोटिस में शीर्ष परिषद ने कहा है कि आपके खिलाफ सदस्यों की शिकायतों पर विचार करने के बाद इस महीने की 10 तारीख को शीर्ष परिषद की बैठक में कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया गया कि आपने नियमों का उल्लंघन किया है. शीर्ष परिषद आपको निलंबित कर रही है और शिकायतों की जांच पूरी होने तक एचसीए की आपकी सदस्यता भी खत्म की जा रही है.

अजहरुद्दीन को 27 सितंबर 2019 को एचसीए का अध्यक्ष बनाया गया था. इसके बाद से ही वो लगातार विवादों में रहे हैं.नोटिस में ये भी कहा गया है कि अजहर ने एसोसिएशन को यह खुलासा नहीं किया कि वह दुबई के एक निजी क्रिकेट क्लब के सदस्य हैं, जो कथित तौर पर एक टूर्नामेंट में भाग लेता है, जिसे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा मान्यता हासिल नहीं है.

अजहर का अंतरराष्ट्रीय करियर

अजहरुद्दीन ने भारत के 334 वनडे में 36 से ज्यादा के औसत से 9378 रन बनाए. अजहर ने वनडे में 7 शतक और 58 अर्धशतक ठोके. वहीं टेस्ट में उनके बल्ले से 45.03 की औसत से 6215 रन निकले. अजहर ने 22 शतक और 21 अर्धशतक लगाए. मोहम्मद अजहरुद्दीन की गिनती दुनिया के सबसे कलात्मक बल्लेबाजों में होती थी. यहीं नहीं, उन्हें भारत के सबसे सफल कप्तानों में भी गिना जाता है. क्रिकेट के कई रिकॉर्ड मोहम्मद अजहरुद्दीन के नाम दर्ज हैं. अजहर दुनिया के अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अपने पहले तीनों टेस्ट मैचों में शतक लगाए. वनडे में सबसे पहले 9000 रन का आकंड़ा छूने वाले खिलाड़ी भी अजहर ही हैं.

मैच फिक्सिंग का आरोप

साल 2000 में अजहर का नाम मैच फिक्सिंग में सामने आया उनपर लाइफ टाइम के लिए बैन लगा दिया गया. हालांकि साल 2012 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने उन पर लगे आजीवन प्रतिबंध को खारिज कर दिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. अजहर का क्रिकेट करियर इससे काफी पहले खत्म हो चुका था

मोहम्मद अजहर ने क्रिकेट के अलावा राजनीति में भी हाथ आजमाया. साल 2009 में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की और मुरादाबाद लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. वर्ष 2014 का चुनाव वो हार तो गए. 2018 में उन्हें तेलंगाना कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था.

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