नई दिल्ली: दिलीप कुमार (Dilip Kumar) की पाकिस्तान की प्रॉपर्टी (Dilip Kumar Property) को लेकर बड़ा ट्विस्ट आया है. जहां एक तरफ हवेली के मौजूदा मालिक, हवेली की सही रकम पाने के लिए सरकार से जद्दोजहद कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ दिलीप कुमार (Dilip Kumar) के एक रिश्तेदार ने हवेली के कागजात उनके पास होने का दावा किया है.  

रिश्तेदार क्या क्या है कहना

पाकिस्तान में दिलीप कुमार (Dilip Kumar) के एक रिश्तेदार ने शुक्रवार को दावा किया कि उनके पास अभिनेता (Dilip Kumar) की यहां स्थित हवेली की ‘पावर ऑफ अटार्नी’ (Power Of Attorney) है. उन्होंने कहा कि कुमार उन्हें अपनी पैतृक संपत्ति उपहार में देना चाहते हैं. दिलीप कुमार (Dilip Kumar) के रिश्तेदार और सरहद चैंबर ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व अध्यक्ष फुआद इशाक (Fawad Ishaq) ने कहा कि उनके पास पेशावर स्थित उक्त संपत्ति की वैधानिक पावर ऑफ अटार्नी (Power Of Attorney) है. उन्होंने कहा कि 98 वर्षीय दिलीप कुमार (Dilip Kumar) ने 2012 में पावर ऑफ अटार्नी कराई थी. 

हवेली के मौजूदा मालिक की यह है मांग

आपको बता दें कुछ दिन पहले दिलीप कुमार (Dilip Kumar) की इस संपत्ति को सरकारी दर में बेचने का प्रस्ताव इस घर के मौजूदा मालिक हाजी लाल मुहम्मद (Haji Lal Muhammad) को दिया गया था. हाजी लाल (Haji Lal Muhammad) ने इस घर को प्राइम लोकेशन पर स्थित संपत्ति बताते हुए सरकारी दर के बजाय 25 करोड़ रुपये कीमत दिए जाने की मांग की थी. प्रांतीय सरकार ने पिछले महीने पेशावर स्थित दिलीप कुमार (Dilip Kumar) के चार मरला (करीब 101 वर्ग मीटर) क्षेत्रफल वाले घर को राष्ट्रीय विरासत घोषित करने के लिए 80.56 लाख रुपये की कीमत लगाई थी. लेकिन हाजी लाल मोहम्मद (Haji Lal Muhammad) का कहना है कि जब भी पेशावर प्रशासन उनसे संपर्क करेगा तो वह प्रांतीय सरकार से 25 करोड़ रुपये की मांग करेंगे. हाजी लाल (Haji Lal Muhammad) का कहना है कि साल 2005 में जब इस हवेली को उन्‍होंने खरीदा था तब इसमें 51 लाख रुपए खर्च हुए थे. ऐसे में 16 साल बाद राज्‍य सरकार की ओर से शहर के प्राइम लोकेशन पर मौजूद इस इमारत के महज 80.56 लाख रुपए तय करना न्‍यायपूर्ण नहीं है

कया है मारला

मालूम हो कि मारला क्षेत्र की पैमाइश के लिए पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश में इस्तेमाल होनी वाली एक परंपरागत माप या मानक है. एक मारला को 272.25 वर्ग फीट या 25.2929 वर्गमीटर के बराबर माना जाता है. खैबर पख्तूनख्वा की प्रांतीय सरकार ने सितंबर में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हो चुकी इस इमारत के संरक्षण के लिए मकान को खरीदने का फैसला किया था. पुरातत्व विभाग ने प्रांतीय सरकार से इस ऐतिहासिक महत्‍व की इमारत को खरीदने के लिए रकम को जारी करने की गुजारिश भी की थी. 

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