नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर में लोगों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया कई वादे किए गए लेकिन एक भी पूरा नहीं किया गया।

कश्मीरी पंडितों और कश्मीरी मुसलमानों के बीच दूरी पैदा करवाई जा रही हैं। जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं और मुसलमानों के बीच फैली नफरत से दूसरे दलों को फायदा होगा।

उन्होंने कहा कश्मीर में जब पुलिस कर्मी सुरक्षित नहीं हो आम आदमी के हाल क्या होंगे। हिंसा में लोगों की मौत से सभी दुखी हैं। परिसीमन आयोग के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में कोई पत्र भी नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक उद्देश्यों के लिए धर्म का प्रयोग ठीक नहीं। जब भी चुनाव करीब आते हैं तो कुछ दलों को धर्म खतरे में लगने लगता है और चुनाव जीतने के लिए जानबूझकर धर्म का कार्ड खेलते हैं।

फारूक शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में भाग ले रहे थे। नेशनल कांफ्रेंस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की बैठक में शनिवार को तीन प्रस्ताव पारित किए गए। इसमें घाटी में कश्मीरी प्रवासी पंडितों की वापसी और पुनर्वास और उनके राजनीतिक सशक्तिकरण के बारे में विस्तार से चर्चा हुई।

पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की अध्यक्षता में सम्मेलन की शुरुआत की गई। सम्मेलन के दौरान तमिलनाडु में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत समेत अन्य के निधन पर दुख जताया गया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह सेना के साथ खड़े हैं।
इससे पहले पूर्व सीएम फारूक ने वीरवार को कहा कि भगवान राम और अल्लाह कभी खतरे में नहीं हो सकते। केवल राजनीतिज्ञ स्वार्थ के लिए उनके नाम का गलत प्रयोग करते हैं। धर्म लोगों को विभाजित करने के लिए नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का माध्यम है। धर्म के नाम पर लोगों को बांटने वाले दलों का पर्दाफाश होना चाहिए।

नेकां प्रमुख ने आरोप लगाया कि कई हिस्सों में आज भी अनुसूचित जाति वर्ग से भेदभाव होता है और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। आरक्षण के बेहतर परिणाम सामने आए हैं और एससी वर्ग से अच्छे डॉक्टर व इंजीनियर निकले हैं। सभी क्षेत्रों में अच्छे कारनामे करके दिखाए हैं।

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