आंध्र भाजपा की गुंटूर स्थित जिन्नाह टॉवर का नाम बदलने की मांग !

आंध्र भाजपा की गुंटूर स्थित जिन्नाह टॉवर का नाम बदलने की मांग !
ए. पी. जे. अब्दुल कलाम या कवी ग्रुम जोशुआ का दे नाम, भाजपा नेताओ की मांग.

गुंटूर : आंध्र भाजपा का गुंटूर मे स्थित जिन्नाह टॉवर सेंटर का नाम बदलने की मांग. आंध्र प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता दक्षिणी भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में जिन्ना टॉवर को गिराने की मांग कर रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सूमो वेराजू ने गुरुवार को कहा कि पूरे देश से गद्दारों के नाम हटा दिए जाने चाहिए, जबकि भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सत्य कुमार ने आश्चर्य व्यक्त किया कि भारत के विभाजन के लिए जिन्नाह का नाम जिम्मेदार था। फिर इसे एक ऐतिहासिक मीनार के रूप में कैसे जारी रखा जा सकता है .बीजेपी ने राज्य सरकार से कहा है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो बीजेपी कार्यकर्ता टावर को गिरा देंगे. हैदराबाद में बीजेपी के गोशा-महल के विधायक राजा सिंह ने भी जिन्ना के नाम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसे जारी नहीं रखना चाहिए। उन्होंने जिन्नाह टॉवर को गिराने की मांग की है. राजा सिंह ने आंध्र प्रदेश सरकार से मांग की कि जिन्नाह का नाम तुरंत जगह से हटा दिया जाए और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम या कवि ग्रूम जोशुआ के नाम पर रखा जाए।

स्थानीय मुस्लिम लीग के नेता बशीर का कहना है कि जिन्ना टावर एक ऐतिहासिक इमारत है और इसे नुकसान पहुंचाना ठीक नहीं होगा. उन्होंने कहा कि जिन्ना टॉवर की सुरक्षा के लिए मुस्लिम लीग द्वारा कानूनी संघर्ष छेड़ा जाएगा।इस बीच गुंटूर के स्थानीय नेता मोहम्मद फारूक शिबली ने भाजपा नेताओं का मजाक उड़ाते हुए कहा कि हाल ही में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष द्वारा 50 रुपये में सस्ती शराब देने के वादे को लेकर बयान दिया गया था, जिसके बाद भाजपा पीके को राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है. मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए गुंटूर के जिन्ना टावर को निशाना बनाया जा रहा है.

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जिन्ना टावर्स के बारे में ऐतिहासिक तथ्य

जिन्ना टावर्स के बारे में कुछ तथ्य यह है कि जिन्ना टॉवर को 1940 में गुंटूर के केंद्र महात्मा गांधी रोड पर बनाया गया था। महात्मा गांधी रोड पर जिन्ना टॉवर के निर्माण का उद्देश्य सद्भाव और एकजुटता को बढ़ावा देना था। इस अवधि के दौरान मुहम्मद अली जिन्ना को गुंटूर का दौरा करना था। हालांकि वह गुंटूर नहीं जा सके थे l

भारत के विभाजन की दर्दनाक प्रक्रिया और भारत और पाकिस्तान के संबंधों में कटुता के बावजूद, स्थानीय लोग जिन्ना टॉवर को एक ऐतिहासिक स्मारक मानते हैं और सात दशकों में इस पर कभी कोई कड़ी प्रतिक्रिया नहीं हुई है। कुछ साल पहले तक जिन्ना टावर की हालत खस्ता थी, लेकिन हेरिटेज एक्टिविस्ट शिव रेड्डी जी की कोशिश के बाद, नगरनिगम गुंटूर ने इसका जीर्णोद्धार किया और न केवल आसपास के फव्वारे की मरम्मत की, बल्कि रात में इसे पेंट भी किया। उन्होंने रोशनी की भी व्यवस्था की। .

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