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दिल्ली हिंसा: मदीना मस्जिद आगजनी मामले में कोर्ट ने पुलिस के उदासीन रवैये पर जताया दुख

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नई दिल्ली, 21 जुलाई। दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर दुख व्यक्त किया है जिसने निचली अदालत के सामने यह तथ्य नहीं बताया कि उसने उत्तरी-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान मदीना मस्जिद में हुए आगजनी के मामले में एक अलग एफआईआर दर्ज की थी। अदालत ने कहा कि यह जांच एजेंसी के उदासीन रवैया दर्शाता है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने दिल्ली पुलिस की पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार कर लिया और रिकॉर्ड एसीएमएम को वापस भेज दिया। एसीएमएम ने पूरे मामले पर समग्र रूप से विचार करने के लिए मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश पारित किया क्योंकि अलग से प्राथमिकी जैसे नए तथ्य सामने आए।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि “जाहिर है, आदेश पारित करते समय विद्वान एसीएमएम (उत्तर-पूर्व) को प्राथमिक दर्ज करने से संबंधित तथ्य उपलब्ध नहीं कराया गया था। यहां तक कि जांच एजेंसी द्वारा उक्त न्यायालय के समक्ष मामला दर्ज करने के संबंध में कभी भी प्राथमिकी दर्ज करने का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। प्रथम दृष्टया यह जांच एजेंसी की लापरवाही को दर्शाता है।”

अदालत ने कहा कि “इस मामले में जांच एजेंसी द्वारा अपनाए गए उदासीन रवैये को देखकर काफी दुख हुआ है।”

कोर्ट ने आगे कहा “पुलिस को यह भी पता नहीं था कि करावल नगर (पुलिस स्टेशन) में एक प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी थी, जब तक प्रतिवादी ने अपनी याचिका के साथ विद्वान एसीएमएम की अदालत में संपर्क किया था। जांच एजेंसी का कर्तव्य है कि वह पूरे तथ्यों के बारे में एसीएमएम को अवगत कराए और उसके सामने पूरी सामग्री रखे, जो कि नहीं किया गया है।”

क्या था मामला?
25 फरवरी, 2020 को इलाके में बिजली कटौती के बाद दंगाइयों ने शिव विहार की मस्जिद में तोड़फोड़ की और अंदर दो एलपीजी सिलेंडर में आग लगा दी, जिससे विस्फोट हो गया। बाद में एक स्थानीय ने इस मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा लगाया, जिसे शिकायत में दो अन्य लोगों के साथ नामजद किया गया है। अदालत के रिकॉर्ड में कहा गया है कि एक प्रत्यक्षदर्शी वकील अहमद, जिसने भीड़ को समझाने की कोशिश की, पर तेजाब से हमला किया गया और उसकी आंखों की रोशनी चली गई।

4 अप्रैल, 2020 को पुलिस ने पहली बार मस्जिद कमेटी के सदस्य हाशिम अली को एक स्थानीय नरेश चंद की शिकायत पर आगजनी और लूट के मामले में गिरफ्तार किया, जिसकी तीन दुकानों में 28 फरवरी को भीड़ ने आग लगा दी थी और लूट की थी। इस शिकायत को एफआईआर में बदल दिया गया था।

जमानत मिलने के बाद अली ने 1 मार्च, 2020 को अपने घर में आग लगाने की शिकायत भी दर्ज कराई थी, जिसे पुलिस ने नरेश की शिकायत में ही शामिल कर लिया। अली ने एक अलग शिकायत में उन 15 दंगाइयों का भी नाम लिया था, जिन्होंने कथित तौर पर मस्जिद को आग के हवाले कर दिया था। पुलिस का दावा है कि उसने इसी प्राथमिकी के साथ जोड़ा था।

1 फरवरी 2021 को दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस को सशस्त्र दंगाइयों द्वारा पूर्वोत्तर दिल्ली में मस्जिद पर हमले की प्राथमिकी दर्ज करने और उनके वकील एमआर शमशाद द्वारा दायर एक याचिका के बाद पूरी जांच करने का आदेश दिया था।

कोर्ट के सामने पुलिस ने लिया यू-टर्न
इसके बाद 17 मार्च को अदालत ने डीसीपी (पूर्वोत्तर) को जांच के संबंध में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था और पाया था कि शिकायतकर्ता हाजी हाशिम अली को गिरफ्तार करना पुलिस का बेतुकापन थी।

जब कोर्ट ने केस डायरी, गवाहों के बयान और सबूतों पर पुलिस से पूछताछ की तो पुलिस ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि उन्हें एक प्राथमिकी मिली है जिसमें मस्जिद जलाने की शिकायत दर्ज की गई थी। मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश ने पुलिस पर जांच में “उदासीन रवैये” का आरोप लगाया था।

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Jamil Khan
Jamil Khan
Jamil Khan is a journalist,Sub editor at Reportlook.com, he's also one of the founder member Daily Digital newspaper reportlook
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