दिल्ली दंगे के मामले के उमर खालिद और शरजील इमाम, ताहिर हुसैन सहित सभी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 1 मार्च तक के लिए बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस ने हिंसा के सिलसिले में 755 मामले दर्ज किए गए थे और लगभग 1,800 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

जानकारी के अनुसार, नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद बीते साल 24 फरवरी कोउत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। साथ ही सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा था। उग्र भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूंक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया।

इस दौरान राजस्थान के सीकर के रहने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की 24 फरवरी को गोकलपुरी में हुई हिंसा के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी और डीसीपी और एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल गए थे। साथ ही आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश नाले में फेंक दी गई थी। 

बीते दिनों दिल्ली दंगों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा था कि जिस प्रकार संस्कृत महाकाव्य महाभारत षड्यंत्र की एक कहानी थी, उसी प्रकार उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे भी कथित षड्यंत्र थे, जिसके ‘धृतराष्ट्र’ की पहचान किया जाना अभी बाकी है।

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *