नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ 26 जनवरी को किसानों ने दिल्ली में जमकर उपद्रव किया था। इसमें से कुछ प्रदर्शनकारी लाल किले के ऊपर चढ़ गए थे और अपने हाथ में लिया झंडा फहराया था।

किसानों की सुरक्षाकर्मियों के साथ जमकर झड़प हुई थी। दोनों तरफ से खूब पत्थर भी फेंके गए थे। इस घटना को हुए 72 घंटे से ज्यादा का समय पुरा हो चुका है लेकिन 100 से अधिक प्रदर्शनकारी अभी भी अपने घर और परिवार के बीच नहीं पहुंचे हैं। ये सभी लापता बताए जा रहे हैं।

इनके घरवालों को अभी तक ये नहीं मालूम हैं कि वे कहां और किस हाल में हैं। नतीजतन घरवालों अब एक थाने से दूसरे थाने चक्कर लगा रहे हैं। ताकि उनके बारें में कोई खबर मिल सके। कई दिनों बाद भी कोई खबर न मिलने पर घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया है।

अभी तक केवल 18 लापता लोगों के बारें में मिली जानकारी

अभी तक केवल 18 किसानों के बारे में पुलिस ने कंफर्म किया गया है कि उन्हें गिरफ्तार किया गया है, लेकिन बाकी किसानों का कुछ भी अता-पता नहीं चल रहा है, जिससे उनके परिवार वाले बहुत ही ज्यादा परेशान हैं।

जिन 18 किसानों के बारें में पुलिस ने कन्फर्म किया है। उसमें से सात लोग बठिंडा जिले के तलवंडी साबो उपमंडल के तहत आने वाले बंगी निहाल सिंह गांव के रहने वाले हैं। इन किसानों को दिल्ली पुलिस ने किसान रैली के दौरान लाल किले पर हिंसा के आरोप में अरेस्ट कर लिया था।

कई किसानों को तिहाड़ जेल में किया गया बंद: मनजिंदर सिंह सिरसा

पंजाब ह्यूमन राइट्स आर्गेनाईजेशन नाम के एनजीओ का कहना है कि पंजाब से दिल्ली में गणतंत्र दिवस की ट्रैक्टर परेड के लिए आए करीब सौ किसान गायब हैं।

वहीं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा का भी आज इस मामले में बयान आया है।

सिरसा ने कहा है कि मोगा के 11 प्रदर्शनकारियों को नांगलोई पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जिन्हें अब तिहाड़ जेल में डाल दिया गया है। मोगा के ही तातारी वाला गांव के 12 लोग 26 जनवरी की घटना के बाद से ही गायब हैं। उनका कुछ भी अता-पता नहीं है।

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