दलित बच्चें ने छुई मूर्ति तो गांव वालों ने 60000 का जुर्माना लगा दिया, परिवार बोला – अब अंबेडकर की पूजा करेंगे

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बेंगलुरू से करीब 60 किलोमीटर दूर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. गांव में एक दलित परिवार के बच्चे ने एक जुलूस के दौरान भगवान से जुड़े एक खंभे को छू लिया.

जिसके बाद उसके परिवार पर गांव वालों ने 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है. वहीं दलित परिवार ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि वह अब केवल डॉ. भीमराव अंबेडकर की पूजा ही करेंगे.

दरअसल शोबम्मा अपने परिवार के साथ कर्नाटक के कोलार जिले के पास उल्लेरहल्ली गांव की निवासी हैं. 9 सितंबर को गांव में भूतायम्मा मेला का आयोजन किया गया. गांव के दलितों में गांव के मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है. जब इस मेले के दौरान जुलूस निकाला जा रहा था, उस वक्त शोबम्मा का 15 साल का बेटा बाहर ही था. उसने जुलूस के दौरान एक खंभे को छू लिया जो कि सीधे तौर पर सिद्धिरन्ना की मूर्ति से जुड़ा हुआ था.

गांव के ही एक शख्स ने इस बात का आरोप लगाया और परिवार वालों से गांव के सीनियर लोगों के सामने आने को कहा. दूसरे दिन शोबम्मा ने गांव के सीनियर लोगों से मुलाकात की, जहां उन्हें 1 अक्टूबर तक 60 हजार रुपये चुकाने को कहा गया. गांव की इस पंचायत ने उन्हें सजा तो सुनाई ही साथ ही यह धमकी भी दी कि अगर उन्होंने फाइन नहीं भरा तो ‘गांव से बाहर निकाल दिया जाएगा.’;

हम केवल अंबेडकर की पूजा करेंगे-परिवार

इस पूरे मामले में शोबम्मा ने कहा, ‘अगर भगवान हमें नहीं चाहते हैं, तो हम उनसे प्रार्थना नहीं करेंगे. हम अब से केवल डॉ. भीमराव अम्बेडकर की पूजा करेंगे.’ एक स्थानीय निवासी ने बताया कि गांव में 75-80 घर हैं. इनमें से ज्यादा तर परिवार वोक्कलिगा समुदाय में आते हैं. वहीं गांव में करीब 10 घर दलितों के भी हैं. शोबम्मा का घर गांव के बाहरी इलाके में है. उनका बेटा 10वीं कक्षा में पास ही के गांव में पढ़ता है.

मामला दर्ज, होगी गिरफ्तारी

मामला तब सामने आया जब शोबम्मा ने कुछ शोसल एक्टिविट्स से मदद की गुहार लगाई. कोलार के डिप्टी कमिश्नकर वेंकट राजा ने कहा कि, वह वुधवार को गांव गए थे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी. ‘हमने उन्हें एक प्लॉट दिया है और कुछ पैसे भी ताकि वह घर बना सकें. हम शोबम्मा को सोशल वेलफेयर हॉस्टल में नौकरी भी दे रहे हैं. मैंने पुलिस को भी आरोपियों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए हैं.’ पुलिस ने नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत नारायणस्वामी, वेंकटेशप्पा और गांव के प्रधान के पति, और गांव के उपप्रधान के अलावा कुछ अन्य पर भी मामला दर्ज किया गया है.

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