चंडीगढ़ Poultry Farming: पोल्ट्री फार्मिंग यानी मुर्गी पालन कारोबार को किसान व अन्य लोग अपनी आय का बड़ा साधन बना रहे हैं। मुर्गीपालन ग्रामीणों खास कर महिलाओं के लिए बेहतर विकल्प बन रहा है क्योंकि इसमें उन्हें मेहनत कम लगती है।

मुर्गी पालन व्यवसाय ऐसा कारोबार है जिससे दूसरों को भी रोजगार दिया जा सकता है। जरूरी नहीं कि पढ़े लिखे लोग इस कारोबार को नहीं करना चाहते, बल्कि पोल्ट्री फार्मिंग व्यवसाय कोई भी कर सकता है। इसी सोच के साथ बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में चंडीगढ़ में यह पहल की जा रही है। शहर की बेटियों को मुर्गी पालन की ट्रेनिंग दी जाएगी। इससे वह खुद आत्मनिर्भर बनेंगी और दूसरों को भी रोजगार देंगी। यह पहल पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कालेज फार गर्ल्स सेक्टर-11 ने की है।

कालेज ने सेंट्रल पोल्ट्री डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन (सीपीडीओ) के साथ टाइअप किया है। इसके तहत 21 से 26 मार्च तक कालेज और सीपीडीओ इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 संयुक्त रूप से कालेज कैंपस और सीपीडीओ में वर्कशाप लगाई जाएगी। वर्कशाप में छात्राओं को मुर्गी पालन की खास तरीके की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि भविष्य में छात्राएं आत्मनिर्भर बनने के लिए मुर्गी पालन जैसे कारोबार को शुरू कर सके। इससे बेटियां आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ दूसरों को भी रोजगार दे सकेंगी। पहली वर्कशाप में कालेज की 100 छात्राएं भाग लेगी।

जूलॉजी विभाग की प्रोफेसर डा. उमेश भारती ने बताया कि हमारा प्रयास छात्राओं को आर्थिक रूप से सशक्त क्षेत्रों की प्रेक्टिकल जानकारी देना है। इसके लिए सीपीडीओ के साथ समझौता हुआ है। पहली वर्कशाप में 100 छात्राएं भाग लेंगी भविष्य में छात्राओं की संख्या को बढ़ाया जाएगा। वर्कशाप में कालेज कैंपस के अलावा सीपीडीओ इंडस्ट्रियल एरिया में छात्राओं को विजिट करवाया जाएगा, ताकि वहां पर स्टूडेंट्स बारिकी से जानकारी हासिल कर सके।

प्रिंसिपल डा. अनीता कौशल के अनुसार विकास के लिए आत्मनिर्भरता जरूरी है और उसके लिए पहल अनिवार्य होती है। कालेज की तरफ से स्डूटेंट्स को मूर्गी पालन की जानकारी देने की पहल की जा रही है। भविष्य में दूसरे व्यवसाय के क्षेत्रों के बारे में भी छात्राओं को जानकारी दी जाएगी। प्रो. अनीता ने बताया कि कालेज में विभिन्न स्किल डेवलपमेंट के कोर्स भी हैं, लेकिन कई स्टूडेंट्स ऐसे हैं जो कि उन कोर्स को नहीं कर सकते। यदि स्टूडेंट्स पैसों की कमी के चलते तकनीकी कोर्स नहीं कर सकते तो हम वर्कशाप करवाकर उन्हें तकनीकी कोर्स की जानकारी दे सकते हैं। वर्कशाप में किसी भी संकाय की छात्रा भाग ले सकती है।

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