नई दिल्ली. अस्पतालों की ओपीडी में बच्चों में गर्दन और पीठ में तेज दर्द की शिकायतों के मामलों में 50 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है. चिकित्सकों ने इसे मुख्य रूप से ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान गलत मुद्राओं में बैठने को जिम्मेदार ठहराया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में कंकाल संबंधी समस्याओं में वृद्धि के लिए गलत मुद्रा को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

कोविड महामारी के कारण स्कूलों के बंद होने से स्क्रीन के सामने अधिक समय बिताने को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जिससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है. हड्डी रोग विशेषज्ञ (ऑर्थोपेडिक) और जालंधर में एनएचएस अस्पताल में ‘रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन’ और निदेशक डॉ शुभांग अग्रवाल ने कहा कि गलत ढंग से बैठना भी इसके लिए जिम्मेदार है.

‘बच्चों के आर्थोपेडिक मामलों में 50 प्रतिशत की वृद्धि’

डॉ अग्रवाल ने कहा, “बाल चिकित्सा आर्थोपेडिक मामलों में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. उनमें से अधिकतर मामले अधिक वजन, चिंता और अन्य विकार से संबंधित हैं.” वसंत कुंज में ‘पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक कंसल्टेंट, इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर’ की चिकित्सक डा. सुरभित रस्तोगी के अनुसार बहुत सारे बच्चे गर्दन और पीठ में जकड़न का अनुभव कर रहे हैं जो मुख्य रूप से कामकाजी वयस्क आबादी में देखा जाता है.

उनके अनुसार इसका मुख्य कारण बच्चों को उनके घरों तक सीमित रखना और धूप के संपर्क में नहीं आना है. आगरा में स्थित उजाला सिग्नस रेनबो अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ विशाल गुप्ता ने कहा, “जब बच्चे पीठ दर्द की शिकायत करते हैं, तो कई बार कोई गंभीर कारण होता है, चाहे वह चोट, संक्रमण या ट्यूमर के कारण हो. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए.”

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