नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप पर पहुंचे. अंडमान निकोबार में कई विकास परियाजनाओं के उद्घाटन कर उन्होंने देश के युवाओं का आह्वान किया और कहा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह स्वतंत्रता का तीर्थ स्थान है… मैं सभी युवाओं से एक बार अंडमान और निकोबार की यात्रा करने का आग्रह करता हूं.

इस दौरान उन्होंने वी डी सावरकर को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानी की देशभक्ति और वीरता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है. ऐसे लोगों को ‘कुछ शर्म’ करनी चाहिए.

गृह मंत्री ने राष्ट्रीय स्मारक सेलुलर जेल में सावरकर के चित्र पर माल्यार्पण भी किया. स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सावरकर को याद करते हुए शाह ने कहा, ‘इस जेल में तेल निकालने के लिए कोल्हू के बैल की तरह पसीना बहाने वाले और आजीवन कारावास की दो बार सजा पाने वाले व्यक्ति की जिंदगी पर आप कैसे शक कर सकते हैं. शर्म करो.’

इस जेल में भारत के लंबे स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों को कैद किया गया था.

शाह ने कहा ‘सावरकर के पास वह सब कुछ था, जो उन्हें अच्छे जीवन के लिए चाहिए होता, लेकिन उन्होंने कठिन रास्ता चुना, जो मातृभूमि के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है.’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाल ही में कहा था कि एक सम्मानित हिंदुत्व विचारक वी डी सावरकर ने महात्मा गांधी की सलाह पर अंग्रेजों के समक्ष दया याचिका दाखिल की थी, जिससे विवाद पैदा हो गया था .

सिंह ने कहा था, ‘बार-बार, यह कहा जाता है कि उन्होंने जेल से अपनी रिहाई की मांग करते हुए ब्रिटिश सरकार के समक्ष दया याचिका दाखिल की… सच तो यह है कि उन्होंने खुद को रिहा करने के लिए दया याचिका दाखिल नहीं की. (जेल में बंद) व्यक्ति के लिए दया याचिका दायर करना एक नियमित परंपरा है. वह महात्मा गांधी थे, जिन्होंने उनसे दया याचिका दाखिल करने के लिए कहा था.’

इसके बाद शाह ने सावरकर की स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल यात्रा को याद किया.

भारत की आजादी के 75 साल के उपलक्ष्य में सरकार ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रही है और इसी के तहत एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, ‘इस सेल्युलर जेल से बड़ा तीर्थ कोई नहीं हो सकता. यह स्थान एक ‘महातीर्थ’ है, जहां सावरकर ने 10 साल तक अमानवीय यातना सहन की, लेकिन अपना साहस, अपनी बहादुरी नहीं खोई.’

शाह ने कहा कि सावरकर को किसी सरकार ने नहीं बल्कि देश के लोगों ने उनकी अदम्य भावना और साहस के समर्थन में ‘वीर’ नाम दिया. उन्होंने कहा, ‘भारत के 130 करोड़ लोगों द्वारा उन्हें प्यार से दी गई यह उपाधि छीनी नहीं जा सकती.’

उन्होंने कहा कि आज के भारत में ज्यादातर लोग आजादी के बाद पैदा हुए हैं और इसलिए उन्हें ‘देश के लिए मरने’ का मौका नहीं मिला. उन्होंने कहा, ‘मैं आज के युवाओं से इस महान राष्ट्र के लिए जीने का आग्रह करता हूं.’

‘अंडमान की हवाओं में सावरकर और बोस मौजूद हैं’

इस दौरान उन्होंने वहां से अंडमान-निकोबार में विकास के लिए 14 परियोजनाओं का उद्घाटन किया जिसकी कुल कीमत 299 करोड़ है. 12 परियोजनाओं का शिलान्यास किया जिसकी लागत 643 करोड़ रुपए है. अंडमान के छोटे से द्वीप के अंदर लगभग 1,000 करोड़ रुपए के विकास योजनाओं को शुरू किया जा रहा है. इस मौके पर उनके साथ लेफ्टिनेंट गवर्नर एडमिरल (रिटायर्ड) डी. के. जोशी भी मौजूद रहे.

इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन मे कहा कि आज अंडमान की हवाओं मे सावरकर और नेता सुभाष चंद्र बोस मौजूद है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को नई पहचान दी.

शाह ने आगे कहा, ‘इस साल हम आजादी का अमृत महोत्सव और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मना रहे हैं. जब हम नेताजी के जीवन को देखते हैं तो हमें लगता है कि उनके साथ अन्याय हुआ है. वह जिस स्थान के हकदार थे, वह इतिहास में उन्हें नहीं दिया गया.

‘ नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप से शाह ने कहा, ‘सालों तक कई नेताओं की छवि खराब करने की कोशिश की गई.
लेकिन अब उन्हें इतिहास में उचित स्थान देने का समय आ गया है.’

‘अपने प्राणों की आहुति देने वालों को इतिहास में जगह मिलनी चाहिए. इसलिए हमने इस द्वीप का नाम नेताजी के नाम पर रखा.’

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