किया कोई मीडिया संस्थान बिना किसी राजनीतिक दल के सहयोग,सरकारी विज्ञापन और बढ़े अनुदान के चल सकता है?

मनोरंजनकिया कोई मीडिया संस्थान बिना किसी राजनीतिक दल के सहयोग,सरकारी विज्ञापन और बढ़े अनुदान के चल सकता है?

जानिए ईन्यूज़रूम के बारे में, जिसने पाँच साल पूरे किया स्वतंत्र मीडिया के तौर पे

ईन्यूज़रूम इंडिया (eNewsroom India) अपने अस्तित्व के पाँचसाल पूरे करने में सक्षम हुआ है तो यह कोई मामूली उपलब्धि नहीं है, यह उसने ऐसा किसी राजनीतिक दल, सरकार या निजी निगमों के संरक्षण के बिना किया है – जो देश में मीडिया संगठनों के लिए सामान्य बात नहीं। अन्य डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के विपरीत, इसे अब तक किसी संगठन से भी कोई बड़ा वित्तीय अनुदान नहीं मिला है।

ईन्यूज़रूम पूर्वी और मध्य भारत के टियर-2 शहरों को कवर करने वाला एक डिजिटल मीडिया संगठन है। यह अंग्रेजी और हिंदी में एक दुभाषिय समाचार पोर्टल है जो मुख्य रूप से चार भारतीय राज्यों- पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान पर केंद्रित ख़बरे करता है।

2017 में, चार पत्रकार- शाहनवाज़ अख़्तर, शबीना अख़्तर, सुचेता चक्रवर्ती और नसरीन खान ने ईन्यूज़रूम की शुरुआत की, जो पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र से संबंधित समाचारों और विचारों के एक विश्वसनीय स्रोत के रूप में उभरा है।

कोलकाता स्थित ईन्यूज़रूम ने पिछले पाँच वर्षों में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय महत्व के कई अच्छी तरह से शोध परख लेख प्रकाशित किए हैं। 

झारखंड और राजस्थान में मॉब लिंचिंग का मामला हो या झारखंड में भूख से मौत, पश्चिम बंगाल और पूरे भारत में में सीएए-एनआरसी विरोध, सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की ‘संस्थागत हत्या’ का मामला हो या कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से लगाया गया लॉकडाउन और इसके प्रभाव से प्रवासी श्रमिक संकट हो, सब पर तथ्यपरक रिपोर्ट की। 2018 में भारत में #MeToo (मीटू) आंदोलन के दौरान, प्रकाशन ने महिला पत्रकारों को उनके शोषक और शक्तिशाली संपादकों द्वारा किए गए उत्पीड़न की कहानियों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

ईन्यूज़रूम के अनुभवी पत्रकारों ने पश्चिम बंगाल और झारखंड में चुनावों के दौरान बेहतरीन ग्राउंड रिपोर्ट्स करी थी। अपने सीमित संसाधनों के बावजूद, ईन्यूज़रूम ने फेसबुक-ट्विटर-यूट्यूब जैसे विभिन्न प्लेटफॉर्म पर एक साथ लाइव प्रोग्राम आयोजित किए हैं।

ईन्यूज़रूम, डीजीपब न्यूज़ इंडिया फ़ाउंडेशन (DigiPub News India Foundation) का भी सदस्य है, जो भारत के केवल-डिजिटल समाचार संगठनों का एक समूह है।

संस्थापक सदस्या, सुचेता कहती हैं, “भारत में वर्तमान सरकारें मीडिया को नियंत्रित कर रही हैं और वो ये तय कर रही हैं की जनता कोप्रसारित किया जाना चाहिए। यह प्रचार करने और लोगों का ब्रेनवॉश करने के लिए मीडिया का उपयोग एक उपकरण के रूप में कर रहा है, लेकिन ईन्यूज़रूम स्वतंत्र रूप से काम करता है। हमारे पत्रकार उन कहानियों को सामने ला रहे हैं जिन्हें बताया और पढ़ा जाना चाहिए, ”वह आगे कहती हैं। “उदाहरण के लिए, दूर-दराज के देशों में फंसे प्रवासी कामगारों की कहानियाँ और उनकी समस्याएं कुछ ऐसी हैं जो हम आम तौर पर किसी अन्य मीडिया आउटलेट में नहीं पाते हैं। लेकिन ईन्यूज़रूम ने ऐसी कई रिपोर्ट्स की हैं।”

वही, शाहनवाज अख़्तर, एक और संस्थापक सदस्य, का मानना है कि ईन्यूज़रूम पूरी तरह से पत्रकारों द्वारा चलाया जाता है। अख्तर ने कहा, “ईन्यूज़रूम देश के उन गिने-चुने संस्थानों में से एक है, जो केवल पत्रकारों द्वारा चलाए जाते हैं।” “यहाँ आप 3,000 शब्दों तक की रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं, जो देश के कुछ ही मीडिया संगठनों द्वारा की जाती हैं। हमारी कहानियाँ ज्यादातर एक्सक्लूसिव होती हैं, और हम मुख्यधारा के मीडिया द्वारा बड़े पैमाने पर नजरअंदाज किए गए ख़बरों पर रिपोर्ट करते हैं।”

“ईन्यूज़रूम की टेक्स्ट और विडियो, दोनों स्टोरीस महत्वपूर्ण होती है,इसलिए इसे सिर्फ न्यूज़ वैबसाइट या यूट्यूब चैनल नहीं समझना चाहिए,” अख़्तर ने बताया।

ईन्यूज़रूम के वित्तीय स्रोतों के बारे में अख्तर ने कहा: “हमें प्रतिदिन के कामकाज को चलाने के लिए छोटे अनुदान, छोटे सहयोग राशि और अंशदान मिलती है।”

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