किसान महापंचायत की बैठक में फैसला, आगामी चुनाव में भाजपा को हराने का आह्वान

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Kisan Mahapanchayat: मुंबई (Mumbai) में रविवार को आयोजित किसान महापंचायत में आगामी सभी विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने का आह्वान किया गया और अन्य मांगों के लिए लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया गया.

इनमें फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए कानून, बिजली संशोधन विधेयक वापस लेने, लखीमपुर खीरी कांड को लेकर केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग शामिल है.

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत ने संसद सत्र की शुरुआत की पूर्व संध्या पर दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में संयुक्त शेतकरी कामगार मोर्चा (एसएसकेएम) के बैनर तले आयोजित किसानों की महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब एमएसपी के समर्थक थे और किसानों के हितों की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी कानून चाहते थे.टिकैत ने मोदी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर बहस से भागने का आरोप लगाया.उन्होंने कहा, ”केंद्र को किसानों को एमएसपी की गारंटी देने के लिए एक कानून लाना चाहिए. कृषि और श्रम क्षेत्रों से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है और हम उन्हें उजागर करने के लिए पूरे देश में यात्रा करेंगे. ”टिकैत ने यह भी मांग की कि केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ साल भर के विरोध प्रदर्शन में जान गंवाने वाले किसानों के परिजनों को वित्तीय सहायता दी जाए. एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर आयोजित महापंचायत ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए केंद्र पर किसानों की जीत की सराहना की और शेष मांगों के लिए संघर्ष का संकल्प लिया.इसमें कहा गया है कि पूरे महाराष्ट्र के किसान, मजदूर, खेतिहर मजदूर, महिलाएं, युवा और सभी धर्मों और जातियों के छात्र इस सम्मेलन में शामिल हुए.विज्ञप्ति में कहा गया है, ” महापंचायत ने कृषि कानूनों को निरस्त कराने में भाजपा-आरएसएस सरकार पर साल भर से चले आ रहे किसानों के संघर्ष की ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया और बाकी मांगों के लिए लड़ने का संकल्प भी जताया. इन मांगों में एमएसपी एवं खरीद की गारंटी के लिए एक केंद्रीय कानून, विद्युत संशोधन विधेयक को वापस लेना, लखीमपुर खीरी घटना के लिए केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा की कैबिनेट से बर्खास्तगी और गिरफ्तारी, चार श्रम संहिताओं का निरसन, निजीकरण के माध्यम से देश को बेचने का अंत आदि शामिल है. ”

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