17.1 C
London
Thursday, June 20, 2024

भाजपा ने अखिलेश यादव के सामने उतारा केन्द्रीय मंत्री को, किसकी होगी नैया पार जानिए आंकड़े

- Advertisement -spot_imgspot_img
- Advertisement -spot_imgspot_img

करहल: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उत्तर प्रदेश के करहल में समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ कद्दावर नेता को चुनाव मैदान में उतारा है, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा हैं क्योंकि यहां के लोग अखिलेश यादव को ‘घर का लड़का’ मानते हैं.

बीजेपी ने सपा मुखिया के सामने केंद्रीय मंत्री को उतारा

भाजपा ने मैनपुरी जिले के करहल विधानसभा क्षेत्र में अखिलेश के खिलाफ केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल को चुनाव मैदान में उतारा है, जहां 20 फरवरी को तीसरे चरण का मतदान होगा. कांग्रेस ने सपा प्रमुख के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है, जबकि बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने इस निर्वाचन क्षेत्र में कुलदीप नारायण को उम्मीदवार बनाया है.

बघेल और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर एक लहर दिखाई देती है, जबकि बहुत से लोगों को उम्मीद है कि ‘भविष्य के मुख्यमंत्री’ का चुनाव करने से क्षेत्र में तेजी से प्रगति होगी. अखिलेश विपक्षी गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, जिसमें राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और जाति-आधारित क्षेत्रीय दलों का एक समूह शामिल है.

करहल अखिलेश के पैतृक गांव सैफई के नजदीक है

करहल इटावा जिले में अखिलेश के पैतृक गांव सैफई से महज चार किलोमीटर दूर है. यह निर्वाचन क्षेत्र मुलायम सिंह यादव की मैनपुरी लोकसभा सीट का हिस्सा है. अखिलेश ने विधान परिषद सदस्य के रूप में मुख्यमंत्री के पद पर कार्य किया और वर्तमान में आजमगढ़ से सांसद भी हैं. अखिलेश अपने गृह क्षेत्र से पहला विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

‘खामोश इंकलाब का गवाह बनेगा करहल

भाजपा नेताओं और समर्थकों का कहना है कि निर्वाचन क्षेत्र ‘खामोश इंकलाब’ का गवाह बनेगा और उनका उम्मीदवार विजयी होगा. बघेल ने मीडिया से कहा कि करहल में मुकाबले को ‘एकतरफा’ रूप में देखना गलत होगा. उन्होंने अखिलेश को आजमगढ़ से भी नामांकन दाखिल करने के बारे में एक बार सोचने की बात कही.

‘किसी भी क्षेत्र को गढ़ नहीं कहा जा सकता’

बघेल एक पुलिस अधिकारी के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सुरक्षा में सेवा दे चुके हैं. उन्होंने कहा है कि किसी भी क्षेत्र को ‘गढ़’ नहीं कहा जा सकता क्योंकि राहुल गांधी और ममता बनर्जी जैसी हस्तियों ने भी अपने गढ़ों में हार का स्वाद चखा है. बनर्जी 2021 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम से अपने पूर्व सहयोगी एवं भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी से हार गई थीं, जबकि राहुल गांधी को 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में भाजपा की स्मृति ईरानी ने हराया था.

‘अखिलेश के लिए आसान नहीं होगी राह’

भाजपा समर्थक आशुतोष त्रिपाठी ने बताया, ‘ये सीट अखिलेश के लिए आसान हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है. बघेल जी को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है और नरेंद्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ की सरकारों द्वारा गरीबों के लिए शुरू की गई योजनाओं के कारण लोग भाजपा को वापस लाना चाहते हैं.’

‘जीत का अंतर 1.25 लाख से अधिक होगा’

सपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र सिंह यादव ने बताया, ‘किसी और के लिए कोई मौका नहीं है. चुनाव एकतरफा है. अखिलेश की जीत का अंतर 1.25 लाख से अधिक होगा. आप जाकर लोगों से बात करें, आपको वास्तविकता का पता चल जाएगा. अगर आप इतिहास को देखते हैं इस निर्वाचन क्षेत्र में आपको सपा के लिए यहां के लोगों के प्यार और स्नेह का पता चलेगा.’

बता दें कि करहल सीट 1993 से सपा का गढ़ रही है. हालांकि, 2002 के विधानसभा चुनाव में यह सीट भाजपा के सोबरन सिंह यादव के खाते में गई थी, लेकिन बाद में वह सपा में शामिल हो गए.

37 प्रतिशत हैं यादव वोटर्स

सूत्रों के मुताबिक करहल में लगभग 3.7 लाख मतदाता हैं, जिनमें 1.4 लाख (37 प्रतिशत) यादव, 34,000 शाक्य (ओबीसी) और लगभग 14,000 मुस्लिम शामिल हैं. बघेल के लिए सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान ने कहा, ‘अब कोई ‘गुंडा राज’ नहीं है. भाजपा सीट जीतेगी. जाति ही सब कुछ नहीं है, यादवों में भी सपा के प्रति नाराजगी है.’ उन्होंने विश्वास के साथ कहा, ‘इस चुनाव में ‘खामोश इंकलाब’ होगा.’

इस क्षेत्र को माना जाता है समाजवादी बेल्ट

सब्जी मंडी के सब्जी विक्रेता प्रदीप गुप्ता के लिए ये चुनाव क्षेत्र के विकास की उम्मीद है. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि अखिलेश जी जीतेंगे. यहां के लोग उनकी जीत चाहते हैं जैसे ही वो मुख्यमंत्री बनेंगे, निर्वाचन क्षेत्र में विकास दिखाई देगा. वो ‘घर के लड़का’ हैं. केवल वे ही यहां विकास सुनिश्चित कर सकते हैं.’ आस-पास के आठ जिलों-फिरोजाबाद, एटा, कासगंज, मैनपुरी, इटावा, औरैया, कन्नौज और फरुखाबाद के 29 निर्वाचन क्षेत्रों को ‘समाजवादी बेल्ट’ माना जाता है.

2012 में जब सपा ने राज्य में सरकार बनाई, तो इन 29 सीटों में से उसने 25 सीटें जीती थीं, जबकि 2017 में चाचा शिवपाल सिंह यादव के साथ अखिलेश के झगड़े के कारण उसे हार का सामना करना पड़ा और केवल छह सीटें मिलीं. अब, चाचा-भतीजे वोट के बंटवारे को रोकने के लिए एक साथ हैं.

पहले भी अखिलेश के खिलाफ चुनाव लड़े हैं बघेल

ये दूसरी बार है जब बघेल अखिलेश यादव के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, पहली बार 2009 में लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद सीट पर अखिलेश के साथ उनका मुकाबला हुआ था और बघेल चुनाव हार गये थे. 2009 के फिरोजाबाद लोकसभा उपचुनाव में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव से भी बघेल हारे थे और 2014 के लोकसभा चुनाव में फिरोजाबाद से मुलायम के चचेरे भाई राम गोपाल यादव के बेटे अक्षय के खिलाफ भी बघेल को हार का मुंह देखना पड़ा था.

- Advertisement -spot_imgspot_img
Jamil Khan
Jamil Khan
जमील ख़ान एक स्वतंत्र पत्रकार है जो ज़्यादातर मुस्लिम मुद्दों पर अपने लेख प्रकाशित करते है. मुख्य धारा की मीडिया में चलाये जा रहे मुस्लिम विरोधी मानसिकता को जवाब देने के लिए उन्होंने 2017 में रिपोर्टलूक न्यूज़ कंपनी की स्थापना कि थी। नीचे दिये गये सोशल मीडिया आइकॉन पर क्लिक कर आप उन्हें फॉलो कर सकते है और संपर्क साध सकते है

Latest news

- Advertisement -spot_img

Related news

- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here