बीरभूम ‘हिंसा’ में नहीं हुई किसी ‘हिंदू’ की ‘मौत’, फर्जी ख़बरें फैलाने वालों को पुलिस ने दी चेतावनी 

फ़ैक्टचेकबीरभूम 'हिंसा' में नहीं हुई किसी 'हिंदू' की 'मौत', फर्जी ख़बरें फैलाने वालों को पुलिस ने दी चेतावनी 

बीरभूम: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हिंसा और दुष्कर्म की खबरों को लेकर कोहराम मचा हुआ है. हिंसा की खबरों को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से बात कर चिंता जाहिर की. वहीं बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात भी की.

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में हुई हिंसा के सिलसिले में अब तक 20 लोगों की गिरफ्तारी हुई है. बीरभूम के पुलिस अधीक्षक एनएन त्रिपाठी के मुताबिक गिरफ्तार किए गए 20 लोगों में से 10 को पुलिस हिरासत में, जबकि अन्य को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस का दावा है कि इस हिंसा में 8 लोगों की जान गई है.

इस बीच सोशल मीडिया पर बीरभू​म हिंसा को लेकर फर्जी खबरें भी फैलाई जा रही हैं, जिनका बंगाल पुलिस ने संज्ञाल लिया है. एक ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया गया कि बीरभू​म में 10 हिंदू महिलाओं और 2 हिंदू बच्चों सहित कुल 12 लोगों को जिंदा जला दिया गया. पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए बताया कि बीरभूम में किसी हिंदू की जान नहीं गई है और ऐसी फर्जी खबरें प्रसारित करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

पश्चिम बंगाल पुलिस ने अपने ट्वीट में चेतावनी देते हुए लिखा, ”बीरभूम में रामपुरहाट के बोगटुई गांव में किसी हिंदू महिला या बच्चे की मौत नहीं हुई है. इस दुखद घटना को साम्प्रदायिक रंग देकर सोशल मीडिया पर फर्जी खबरें प्रसारित करने और पश्चिम बंगाल में सामाजिक अस्थिरता फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.”

आपको बता दें कि बीरभूत जिले में रामपुरहाट कस्बे के बाहरी इलाके में स्थित बोगटुई गांव में तृणमूल कांग्रेस के नेता और उप प्रधान भादू शेख की हत्या के बाद 21 मार्च की रात कथित तौर पर करीब 1 दर्जन मकानों में आग लगा दी गई थी. पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस घटना में 8 लोगों की जलकर मौत हो गई.

पश्चिम बंगाल सरकार ने घटना की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (CID) ज्ञानवंत सिंह की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से घटना पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए बीरभूम पुलिस से 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट तलब किया था.

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