बिल गेट्स (Bill Gates) माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक और दुनिया के सबसे अमीर लोगों में एक रहे हैं। उनका विभिन्न देशों में कारोबार फैला हुआ है। वे अपनी जिंदगी में एक पाकिस्तानी को कभी नहीं भूल सकेंगे। इस एक पाकिस्तानी से बिल गेट्स (Bill Gates) भी ‘ठगी’ का शिकार हो गए। एक पाकिस्तानी (Pakistani) शख्स ने बिल गेट्स से 7 अरब से अधिक रुपये ‘ठग’ (Fraud with Bill Gates) लिए. एक किताब में ऐसा दावा किया गया है।

किताब ‘The Key Man: The True Story of How The Global Elite was Duped by a Capitalist Fairy Tale’ में दावा किया गया है कि आरिफ नकवी (Arif Naqvi) नाम के एक पाकिस्तानी ने बिल गेट्स से 100 मिलियन डॉलर (लगभग 7 अरब 41 करोड़ रुपये) ठग लिए थे। इस किताब को Simon Clark और Will Louch ने लिखा है. किताब में कहा गया कि असल में आरिफ नकवी एक ‘ठग’ था, जो अरबपति लोगों की संपत्ति हड़पने का काम करता था।

कौन है ये आरिफ रिपोर्ट के मुताबिक आरिफ पाकिस्तान की एक प्राइवेट इक्विटी फर्म का चीफ था। वह दुनिया के इंवेस्टर्स का अलग-अलग बिजनेस में पैसा लगवाने का काम करता था। इसी बीच उसने बिल गेट्स सहित कई अमीरों से अच्छे संबंध बना लिए बाद में इन्हीं संबंधों का फायदा उठवाकर उसने इनवेस्ट कराने के नाम पर बिल गेट्स से भारी भरकम रकम ऐंठ ली।

किताब के मुताबिक, आरिफ नकवी ने करीब 100 मिलियन डॉलर की हेराफेरी की थी। इसमें से आधी रकम का कोई हिसाब-किताब नहीं मिला। ऐसे में नकवी इस मामले में जेल की हवा खा सकता है। क्योंकि उसके एक कर्मचारी ने सभी इंवेस्टर्स को ई-मेल भेजकर इसकी जानकारी दे दी थी।

सुपर अमीरों से बना रखे थे संबंध अपने रसूख के बल पर आरिफ नकवी ने बिल गेट्स, बिल क्लिंटन और Goldman Sachs के पूर्व सीईओ रहे लॉयड ब्लैंकफेन सहित सुपर अमीर के साथ अच्छे संबंध बना लिए थे। इन संबंधों का फायदा उठवाकर उन्होंने इन्वेस्ट कराने के नाम पर बिल गेट्स से भारी भरकम ली और फिर उसे ‘हड़प’ लिया।

ओबामा भी थे नकवी के मुरीद आरिफ नकवी (Arif Naqvi) का असर इतना बढ़ चुका था कि अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 250 अन्य मुस्लिम व्यापारिक नेताओं के साथ, 2010 में उद्यमिता पर एक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए उसे आमंत्रित किया।

इस सम्मेलन के 2 महीने बाद अमेरिकी सरकार ने नकवी के अबराज ग्रुप में 15 करोड़ डॉलर का निवेश किया। किताब के लेखक लिखते हैं कि आरिफ नकवी ने अपना असर बढ़ाने के लिए दुनिया भर की यूनिवर्सिटी को लाखों डॉलर दिए। इनमें अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स भी शामिल रहे।

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