[email protected]

अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर भागे अशरफ गनी को तजाकिस्तान में नहीं मिली लैंडिग की इजाजत, दूसरे देश ने दी पनाह

- Advertisement -
- Advertisement -

अफगानिस्तान (Afghanistan) के राष्ट्रपति अशरफ गनी (Ashraf Ghani) ओमान (Oman) में हैं. तालिबान (Taliban) के राजधानी काबुल (Kabul) पर कब्जे के बाद गनी एक प्राइवेट विमान के जरिए ताजिकिस्तान (Tajikistan) के लिए निकले थे. मगर उनके विमान को वहां लैंड होने की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद वह ओमान रवाना हुए. फिलहाल गनी ओमान में मौजूद हैं और यहां से उनके अमेरिका (America) जाने की चर्चा हैं. अफरफ गनी के अलावा अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहिब (Mohib) भी ओमान में मौजूद हैं.

इससे पहले, अशरफ गनी ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने अफगानिस्तान में खून-खराबे से बचने के लिए देश छोड़ दिया. तालिबान से घिर जाने और राजधानी काबुल पर लड़ाकों के कब्जा करने के बाद राष्ट्रपति ने देश छोड़ दिया था. अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और राष्ट्रीय सुलह के लिए उच्च परिषद के प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला एक समावेशी सरकार के लिए तालिबान के साथ बातचीत करने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि तालिबान इस पर कैसे प्रतिक्रिया देने वाला है. वहीं, अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ताजिकिस्तान जाने से पहले पंजशीर में थे.

अशरफ गनी ने देश छोड़ने को लेकर क्या कहा?

राष्ट्रपति अशरफ गनी ने कहा है कि वह काबुल छोड़कर इसलिए चले गए ताकि वहां खून-खराबा और बड़ी मानवीय त्रासदी न हो. उन्होंने तालिबान से कहा कि वह अपने इरादे बताए और देश पर उसके कब्जे के बाद अपने भविष्य को लेकर अनिश्चय की स्थिति में आए लोगों को भरोसा दिलाए. रविवार को अफगानिस्तान छोड़कर जाने के बाद गनी ने पहली बार टिप्पणी की है. इसमें उन्होंने कहा, ‘मेरे पास दो रास्ते थे, पहला तो राष्ट्रपति भवन में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे ‘सशस्त्र तालिबान’ का सामना करूं या अपने प्रिय देश को छोड़ दूं जिसकी रक्षा के लिए मैंने अपने जीवन के 20 साल समर्पित कर दिए.’

गनी ने रविवार को फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा, ‘यदि असंख्य देशवासी शहीद हो जाएं, अगर वे तबाही का मंजर देखते और काबुल का विनाश देखते तो 60 लाख की आबादी वाले इस शहर में बड़ी मानवीय त्रासदी हो सकती थी. तालिबान मे मुझे हटाने के लिए यह सब किया है और वे पूरे काबुल पर और काबुल की जनता पर हमला करने आए हैं. रक्तपात होने से रोकने के लिए मुझे बाहर निकलना ठीक लगा.’ गनी ने कहा कि तालिबान चरमपंथियों के सामने बड़ी परीक्षा अफगानिस्तान के नाम और इज्जत को बचाने की या दूसरी जगहों और नेटवर्कों को प्राथमिकता देने की है.

काबुल यूनिवर्सिटी के चांसलर भी रह चुके हैं अशरफ गनी

शिक्षाविद गनी अफगानिस्तान के 14वें राष्ट्रपति हैं. उन्हें सबसे पहले 20 सितंबर, 2014 को निर्वाचित किया गया था और 28 सितंबर, 2019 के राष्ट्रपति चुनाव में वह पुन: निर्वाचित हुए. वह लंबी प्रक्रिया के बाद फरवरी 2020 में भी विजयी घोषित किए गए थे और पिछले नौ मार्च को पुन: राष्ट्रपति बने. वह देश के वित्त मंत्री और काबुल यूनिवर्सिटी के चांसलर भी रह चुके हैं. तालिबान ने रविवार को काबुल के बाहरी क्षेत्र में आखिरी बड़े शहर जलालाबाद पर कब्जा कर लिया था और इस तरह अफगानिस्तान की राजधानी देश के पूर्वी हिस्से से कट गई. मजार-ए-शरीफ और जलालाबाद पर रातोंरात कब्जा करने के बाद तालिबान ने काबुल की ओर बढ़ना शुरू कर दिया.

फेसबुक पर ताजा ख़बरें पाने के लिए लाइक करे

Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest news
- Advertisement -
Related news
- Advertisement -
×