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Saturday, December 3, 2022
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यासीन मलिक की सजा पर बोले अजमेर दरगाह के दीवान कहा – किताबें छोड़ बंदूक हाथ में थाम लेने के कर्मों की सजा है।

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अजमेर: टेरर फंडिंग के दो मामलो में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के चीफ यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह सजा बुधवार 25 मई को जुनाई गई। साथ ही मलिक पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

यासीन मलिक को कोर्ट द्वारा सजा मिलने के बाद अजमेर दरगाह के दीवान जैनुअल आबेदीन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यासीन को उसके कर्मों की सजा मिली है।

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इतना ही नहीं, जैनुअल आबेदीन ने कहा कि यासीन मलिक को सजा से पाकिस्तान का आतंक पसंद चेहरा भी बेनकाब हुआ है। यासीन जैसे लोगों को पाकिस्तान टेरर फंडिंग करता रहा है। आपको बता दें कि सैयद जैनुल आबेदीन अली खां अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान व आध्यात्मिक प्रमुख है। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा कि यासीन मलिक को पूरी न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद उसके अपराधों के लिए दंडित किया जा रहा है।

भारत की न्याय व्यवस्था ने एक बार फिर अपनी बुद्धिमत्ता, स्वतंत्रता और पारदर्शी छवि को साबित किया जिसकी प्रशंसा पूरी दुनिया करती है। आबेदीन ने कहा, मलिक ने भारत में आतंकवाद को भड़काकर और कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देकर और निर्दोष कश्मीरियों के हाथ से किताबें छीनकर उनके हाथ में जबरदस्ती बंदूकें देकर उन्हें आतंकवादी बना दिया। उन्होंने कहा कि यासीन को उसके कर्मों की सजा मिली है।

बता दें कि यासीन मलिक को बुधवार की शाम हवालात से कोर्टरूम में लाया गया था, जहां मलिक को कुल 09 धाराओं के तहत सजा सुनाई गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसा बताया जा रहा है कि यासीन मलिक की सजा सुनाए जाने के दौरान कई लोग तिरंगा हाथ में लेकर कोर्ट के बाहर पहुंचे। वहीं, श्रीनगर के पास मैसुमा में यासीन मलिक के घर के पास मलिक समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प की बात भी सामने आई।

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