नई दिल्ली: जगद्गुरु परमहंस आचार्य महाराज (Jagadguru Paramhans Acharya Maharaj) ने मांग की है कि महात्मा गांधी की जयंती (Mahatma Gandhi’s Birth Anniversary) के दिन (2 अक्टूबर) तक भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ (Hindu Rashtra) घोषित किया जाए. इसके साथ ही उन्होंने धमकी दी है कि अगर उनकी यह मांग पूरी नहीं हुई तो वह ‘जल समाधि’ (Jal samadhi) लेंगे.

अयोध्या में मीडिया कर्मियों से बात करते हुए जगद्गुरु परमहंस आचार्य महाराज ने कहा “मेरी मांग है कि 2 अक्टूबर तक भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित कर दिया जाए नहीं तो सरयू नदी (Sarayu River) में जल समाधि ले लूंगा. केंद्र सरकार को मुसलमानों (Muslims) और ईसाइयों (Christians) की राष्ट्रीयता समाप्त करनी चाहिए.”

प्रभावशाली संत की विवादास्पद टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सभी शीर्ष राजनीतिक दल 2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी में पूरे दमखम के साथ जुटे हुए है. यहां एक बात और गौर करने वाली है कि अतीत में भी कई बड़े संतों ने भी इसी तरह की मांग की थी.

इससे पहले जब आम आदमी पार्टी (आप) और समाजवादी पार्टी ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) द्वारा खरीदी गई जमीन पर सवाल उठाए थे, तो संतों ने ट्रस्ट के खिलाफ लगे आरोपों को खारिज करते हुए दोनों पक्षों के खिलाफ 1000 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी थी.

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने राजस्थान के उदयपुर में बौद्धिक समुदाय को संबोधित करते हुए कहा था कि हिंदू राष्ट्र के सर्वोच्च गौरव में विश्व का कल्याण संभव है. सरल शब्दों में हिंदुत्व की व्याख्या करते हुए भागवत ने कहा था, “संघ के स्वयंसेवकों द्वारा कोरोना काल में किया गया नि:स्वार्थ सेवा कार्य हिंदुत्व है क्योंकि इसमें कल्याण की भावना है.”

उन्होंने कहा, “हिंदू विचारधारा शांति और सच्चाई का प्रतीक है. ‘हम हिंदू नहीं हैं’ ऐसा अभियान देश और समाज को कमजोर करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है. समस्याएं सामने आई हैं जहां विभिन्न कारणों से हिंदू आबादी कम हुई है, इसलिए हिंदू संगठन सर्वव्यापी हो जाएगा और विश्व के कल्याण के बारे में बात की जाएगी. विश्व का कल्याण हिंदू राष्ट्र के सर्वोच्च गौरव में होगा.”

संघ के संस्थापक डॉ केशवराव बलिराम हेडगेवार का हवाला देते हुए भागवत ने कहा, “उन्होंने महसूस किया कि दिखने में भारत की विविधता के मूल में एकता की भावना है. हम सभी हिंदू हैं, पूर्वजों के वंशज हैं जो इस पवित्र स्थान पर युगों से रहे हैं. यह हिंदू धर्म की भावना है.”

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