मुंबई की एक विशेष पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम) अदालत ने सोमवार को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख को एक मनी लॉन्ड्रिंग के कथित मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया।

एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) के नेता देशमुख को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पिछले साल दो नवंबर को गिरफ्तार किया था। इस समय वह न्यायिक हिरासत में हैं। विशेष न्यायाधीश आरएन रोकड़े ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।

न्यायाधीश ने देशमुख की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा है कि प्रथम दृष्ट्या यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि देशमुख मनी लॉन्ड्रिंग मामले में संलिप्त थे। उन्होंने कहा कि गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं, लेकिन इस स्तर पर इस पर विचार नहीं किया जा सकता है। यह अनिल देशमुख की पहली सामान्य जमानत याचिता थी। इससे पहले विशेष अदालत ने देशमुख की डिफॉल्ट जमानत याचिका तकनीकी आधार पर खारिज कर दी थी।

इस साल जनवरी में दाखिल की गई अपनी सामान्य याचिका में देशमुख ने कहा था कि मैं जांच एजेंसियों के घोर उत्पीड़न का शिकार हूं। ईडी ने इस याचिका का विरोध किया था और आरोप लगाया था कि देशमुख इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता थे। ईडी ने अनुसार देशमुख के निर्देश पर ही पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने बार मालिकों से वसूली की थी। देशमुख के खिलाफ मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

एजुकेशन ट्रस्ट के जरिए सफेद किया काला धन

इसके बाद सीबीआई और ईडी ने देशमुख के खिलाफ मामले दर्ज किए थे। ईडी का मामला यह है कि गृह मंत्री रहते हुए देशमुख ने कथित तौर पर अपने पद की शक्तियों का दुरुपयोग किया और सचिव वाजे के माध्यम से मुंबई के विभिन्न बार से 4.70 करोड़ रुपये एकत्र किए। ईडी के अनुसार यह काला धन नागपुर के एक शैक्षिक ट्रस्त श्री साई शिक्षण संस्थान के जरिए सफेद किया गया था। इस ट्रस्ट का नियंत्रण भी देशमुख परिवार के हाथ में था।

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