आंध्र प्रदेश के गुंटूर में स्थित जिन्ना टावर को सत्ताधारी वाईएसआरसीपी विधायक मोहम्मद मुस्तफ़ा के आदेश पर तिरंगे के रंग में रंग दिया गया है. 

यह वही टावर है जिस पर 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के मौक़े पर हिंदू वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश की थी. 

न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने मोहम्मद मुस्तफ़ा के हवाले से लिखा है कि “स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मुस्लिम नेताओं ने अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी थी. आज़ादी के बाद कुछ मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान में बस गए लेकिन हम भारतीयों के रूप में अपने देश में रहना चाहते थे और हम अपनी मातृभूमि से प्यार करते हैं.”

मोहम्मद अली जिन्ना के नाम पर बना यह टावर गुंटूर शहर के मुख्य आकर्षण केंद्रों में से एक है.

अपने निर्माण के सात दशक बाद भी जिन्ना टावर सेंटर, गुंटूर में धार्मिक सद्भाव का एक प्रतीक बनकर खड़ा है. 

दिलचस्प बात यह है कि इस इलाक़े में रहने वाले ज़्यादातर ग़ैर मुसलमान हैं. दूसरी ओर गुंटूर में ही लाल बहादुर शास्त्री के नाम का ‘माया बाज़ार’ भी है, जहां मुसलमानों के ही कारोबारी संस्थान मौजूद हैं. 

गुंटूर के मुख्य कारोबारी स्थल जिन्ना टावर सेंटर का नाम बदलने की मांग पहले भी कई बार उठाई जा चुकी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई लोग कह रहे हैं कि जो शख़्स भारत के बंटवारे का ज़िम्मेदार हो, उसके नाम पर इस टावर का नाम नहीं होना चाहिए.

गुंटूर नगर निगम ने हाल में जिन्ना टावर सेंटर में विकास के कई काम पूरे किए हैं. 

यहां पानी का फव्वारा, बाग़, प्रकाश के इंतज़ाम किए गए हैं.

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