काबुल. अमेरिका ने जब से अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी की घोषणा की है, तभी से तालिबान (Talibani Law in Afghanistan) के हमले अचानक बढ़ गए हैं. तालिबान का कहना है कि उसने अफगानिस्तान के 85 फीसदी जिलों को कपने कब्जे में ले लिया है. अफगानिस्तान में उसकी ताकत बढ़ने के साथ ही उससे जुड़े इस्लामिक कानून भी लौट आए हैं. तालिबान के तहत अफगानिस्तान में शरिया कानून (Sharia Law) में राष्ट्रव्यापी वापसी के हिस्से के रूप में समलैंगिक पुरुषों (Gay Men) पर दीवार गिराकर मार दिया जाएगा. इस्लामवादी समूह के जजों ने एक इंटरव्यू में नए नियमों के बारे में जानकारी दी.

तालिबान के 38 साल के जज गुल रहीम ने बताया, ‘शरिया लॉ के तहत कई मामलों में हम पत्थर मारकर जान लेने (संगसार) का हुक्म देते हैं. कुछ मामलों में हम घुटनों को काटने की सजा देते हैं. यह सब उस शख्स के द्वारा किए गये अपराध पर निर्भर करता है.’ यह पूछे जाने पर कि एक गे आदमी को तालिबान कौन सी सजा देगा, जवाब में तालिबानी जज ने कहा कि गे लोगों के लिए हमारे पास दो ऑप्शन हैं. पहला कि या तो उसे पत्थरों से चोट पहुंचाते हुए मार दिया जाए. दूसरा ऑप्शन ये है कि उसके ऊपर दीवार गिरा दी जाए, जिससे उसकी मौत हो जाए.’

शरिया कानून लागू करना तालिबान का मकसद
जज गुल रहीम ने कहा कि उनका मकसद पूरे अफगानिस्तान के अंदर शरिया कानून लागू करना है. उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना के देश से निकलने के बाद हमारा पहला लक्ष्य पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा करना है और फिर पूरे देश में सख्त शरिया कानून लागू करना है. जज गुल रहीम ने कहा, ‘शरिया कानून लागू करने का लक्ष्य हमारा हमेशा से था और रहेगा.’

चोर के काट दिए थे हाथ
तालिबान के 38 साल के इस्लामिक जज गुल रहीम ने जर्मनी के एक न्यूजपेपर को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘अभी कुछ दिन पहले एक शख्स एक घर में चोरी करते हुए पाया गया था. हमने शरिया कानून के तहत उसके हाथ काटने के आदेश दिए. अब उसके हाथ काट दिए गए हैं.’ तालिबानी जज ने कहा, ‘फैसला सुनाते वक्त मैंने अंगूठी के मालिक से पूछा कि क्या वह चाहता है कि चोर का पैर काट दिया जाए, क्योंकि उसने न केवल अंगूठी चुराई बल्कि तोड़ा भी है, जिसका मतलब है कि उसने दो अपराध किए हैं. लेकिन, घर के मालिक ने चोर का पैर काटने से मना कर दिया, जिसके बाद सिर्फ उसके हाथ काटे गए.’

गुनाह के आधार पर तय होती है सजा
वहीं, अपने एक और फैसले का जिक्र करते हुए तालिबानी जज गुल रमीम ने कहा, ‘कुछ दिन पहले एक गैंग पकड़ा गया था, जिसका काम अपहरण और तस्करी करना था. मैंने उन सभी लोगों को फांसी पर लटकाने का हुक्म दिया. सभी को फांसी दे दी गई.’ तालिबानी जज ने कहा, ‘हम गुनाह के आधार पर सजा देते हैं. शुरुआत उंगलियों से करते हैं. सबसे पहले उंगलियों को काटा जाता है. अगर गुनाह ज्यादा बड़ा है तो फिर हाथ और उसके बाद पैरों को काटने का हुक्म दिया जाता है.’

अकेले निकलने के लिए महिलाओं को लेना होगा परमिट
जज ने इंटरव्यू के दौरान कहा, ‘मैंने महिलाओं के अकेले घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी है. अब महिलाएं अकेले घर से बाहर नहीं निकल सकती हैं. उनके साथ उनका शौहर, पिता या भाई ही होना चाहिए.’ यह पूछे जाने पर कि क्या महिलाओं के साथ थोड़ी नरमी नहीं बरती जानी चाहिए? तालिबानी जज ने कहा, ‘हां, हमने नरमी की भी व्यवस्था की है. महिलाओं को अगर अकेले घर से बाहर जाना है, तो उन्हें पहले परमिट लेना होगा.’ जज ने आगे बताया, ‘मैंने लड़कियों को स्कूल जाने में बड़ी रियायत दी है. अब लड़कियां स्कूल जा सकती हैं, लेकिन तभी जब स्कूल की सभी टीचर महिला हों. स्कूल के अंदर सभी के लिए हिजाब पहनना जरूरी होगा.’

तालिबान के जज ने इंटरव्यू के दौरान कहा कि पूरे अफगानिस्तान में शरिया कानून लागू करना हमारा लक्ष्य है और हम उसे लागू करके रहेंगे.

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2 Comments

  1. Tum jise pagal kah rahe wah islamic kanun hai
    Isse apni bahan beti ki izzat aur jaan hamesh mahfuz
    Rahegi

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