महाराष्ट्र निवासी अब्दुल हसन के गीता ज्ञान से यहां इस्कान से जुड़े लोगों को चमत्कृत कर दिया। उन्होंने भगवद्गीता और भगवान कृष्ण के उपदेशों पर आधारित प्रतियोगिता में सभी पचास सवालों के उत्तर दिए। यह प्रतियोगिता इंटरनेशनल सोसाइटी फार कृष्ण कांशसनेस (इस्कान) की अयोध्या इकाई की ओर से आनलाइन हुई।

इसमें दुनिया के तीन हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल थे। संस्था 40 प्रतिशत सवाल हल करने वाले को उत्तीर्ण मानकर गीता डिप्लोमा का प्रमाणपत्र देती है। उत्तीर्ण होने वालों में तो एक हजार पांच सौ प्रतिभागी हैं, किंतु सभी प्रश्नों के सही उत्तर देने वाले अकेले अब्दुल हैं।

27 वर्षीय अब्दुल मूल रूप से महाराष्ट्र के नांदेड़ के रहने वाले हैं और धार्मिक शिक्षक की नौकरी के चलते इन दिनों मुंबई के अंधेरी वेस्ट में रह रहे हैं। उनका पूरा नाम अब्दुल हसन अब्दुल निसार है। दो माह पूर्व ही उनका निकाह हुआ है।

इस्लामिक शिक्षा में स्नातक के बराबर मानी जाने वाली अदीबे कामिल की डिग्री हासिल कर चुके अब्दुल का रुझान विभिन्न धर्मों की ओर है। इसी रुझान के चलते वह इस्कान की आनलाइन प्रतियोगिता से पूर्व गीता पर केंद्रित 18 अध्याय एवं 18 सत्र नाम से आयोजित संवाद एवं शिक्षण के कार्यक्रम में भी शामिल हुए।

अब्दुल कहते हैं, ‘गीता से जीने की सीख मिलती है। यह आत्मा को परमात्मा के बिल्कुल करीब होने का एहसास कराती है और यही बात मुझे प्रभावित करती है।’ इस्कान सामान्य तौर पर प्रमाणपत्र और पुरस्कार आनलाइन ही देती है, किंतु अब्दुल हसन की सफलता से उत्साहित इस्कान के पदाधिकारी जल्दी ही उन्हें अयोध्या आमंत्रित कर पुरस्कृत करने की तैयारी में हैं।

रामनगरी में जड़ जमा रही कृष्ण भक्ति : कान्हा की नगरी मथुरा से लेकर दुनियाभर में स्थापित कृष्ण भक्ति का प्रतिनिधि संगठन इस्कान रामनगरी में भी जड़े जमा रहा है। रामनगर मुहल्ले में पुष्पवाटिका के नाम से इस्कान का साधना केंद्र स्थापित है। इस्कान की अयोध्या इकाई के अध्यक्ष षड्भुज गौरदास हैं।

उनके संरक्षण में गीता पर केंद्रित आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम एवं प्रतियोगिता सतत चलती रहती है और इसमें चार लाख से अधिक लोग शामिल हो चुके हैं।

15 माह में पांचवीं प्रतियोगिता : जिस प्रतियोगिता में अब्दुल अव्वल आए, वह गत 15 माह की अवधि में संस्था की ओर से संयोजित पांचवीं प्रतियोगिता है। आनलाइन कार्यक्रम के प्रोजेक्ट मैनेजर एवं इस्कान के वरिष्ठ साधक देवशेखर विष्णुदास के अनुसार संस्थापकाचार्य भक्ति वेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद का मानना था मनुष्य आत्मा के स्तर पर जाग्रत हो और इस दिशा में बढ़ने पर परमात्मा और आत्मा के बीच जाति-संप्रदाय-शैली का कोई भेद नहीं रहता और अब्दुल हसन जैसे उदाहरण से इस सत्य की जीवंत अनुभूति होती है।

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journalist | chief of editor and founder at reportlook media network

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