लखनऊ: देश में लोकतंत्र है और प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा और विवेक के अनुसार अपनी राजनितिक सोच बनाने और उसका समर्थन करने का पूरा हक है। लेकिन कुछ मामले देखकर लगता है कि देश के एक समुदाय का अभी तक लोकतंत्र में यकीन नहीं है, तभी शायद वे किसी पार्टी विशेष का समर्थन करने वाले से नफ़रत करने लगते हैं, चाहे वो उनके अपने समुदाय का ही क्यों न हो।

ये नफरत कभी तो इतनी भी बढ़ जाती है कि, राजनितिक पार्टी का समर्थन करने वाले की हत्या तक कर दी जाती है, जैसा यूपी में बाबर के साथ हुआ। अब इसकी एक और नई मिसाल उत्तर प्रदेश से ही सामने आई है।

दरअसल, राज्य के बाराबंकी जिले में भाजपा को वोट देने पर कट्टरपंथियों ने एक मुस्लिम परिवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि इस साल के विधानसभा चुनाव में भाजपा के अच्छे कामों के कारण जब से उन्होंने उसे वोट दिया है, तभी से उसी के समुदाय ने उससे दूरियाँ बनानी शुरू कर दी। अब बात यहाँ तक बढ़ गई है कि, उसे मस्जिद में नमाज पढ़ने से भी रोक दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, ये घटना बारबंकी जिले के फतेहपुर कोतवाली क्षेत्र के रेरिया गाँव की है। यहीं पर मोहम्मद आरिफ का परिवार रहता है। घर के मुखिया आरिफ ही हैं।

मोहम्मद आरिफ का कहना है कि भाजपा ने अच्छे काम किए, इसलिए चुनाव में उसे वोट दिया। आरिफ ये बात बड़ी ही शिद्दत से मानते हैं कि मोदी और योगी दोनों का ही काम काफी अच्छा है। इसी वजह से उन्होंने अपने घर में पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की फोटो भी लगा रखी है। वहीं, आरिफ ने यह भी कहा कि एक उन्होंने एक जमीन खरीदी थी, अब उनका ही मुस्लिम समुदाय उनपर दबाव डाल रहा है कि वो ये जमीन मस्जिद बनाने के लिए छोड़ दें। आरिफ का आरोप है कि उनके गाँव का पूर्व प्रधान है मुबारक अली। मुबारक अली के समर्थक गाँव के 50 मुस्लिम परिवारों ने उन्हें गाँव की मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोक दिया है।

यही नहीं 31 मई को आरिफ के बेटे मोहम्मद तालिब का निकाह है, जिसको भी कट्टरपंथियों ने गाँव के लोगों को चेतावनी दी है कि यदि कोई इस निकाह में शामिल हुआ तो, उससे 20,000 रुपए का जुर्माना वसूला जाएगा। इसके अलावा खाना बनाने और टेंट लगाने वालों को भी आरिफ के घर में काम करने से रोक दिया गया है। उनपर भी जुर्माना लगाने की धमकी दी गई है। हालाँकि, आरिफ कहते हैं कि वो इन धमकियों से नहीं डरते। इस बीच SO अनिल कुमार पांडेय ने कहा है कि दोनों पक्षों को थाने बुलाया गया है, ताकि इसका समाधान निकाला जा सके।

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