बकरे की कुर्बानी देने के जुर्म में 3 लोग गिरफ्तार, मामला दर्ज और होगी कड़ी सजा

धर्मबकरे की कुर्बानी देने के जुर्म में 3 लोग गिरफ्तार, मामला दर्ज और होगी कड़ी सजा

इस्लामाबाद, 11 जुलाईः पाकिस्तान के फैसलाबाद प्रांत में तीन अहमदिया मुसलमानों को बकरीद के मौके पर बकरे की कुर्बानी देने के आरोप में रविवार को गिरफ्तार कर लिया गया।

रविवार को मुस्लिम समाज का प्रमुख त्योहार बकरीद (ईद उल अजहा) था। इस मौके पर जानवरों की कुर्बानी देने का रिवाज है।

जमाते-अहमदिया पाकिस्तान के प्रवक्ता मोह्म्मद सलीमुद्दीन ने पाकिस्तान के प्रमुख अखबार डॉन को अहमदिया समुदाय के तीन लोगों की गिरफ्तारी की सूचना दी है। पुलिस में दर्ज करायी गयी एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ताओं को बकरीद की नमाज पढ़ने के बाद पता चला कि अहमदी लोग बकरीद पर पशु बलि दे रहे हैं। सलीमुद्दीन ने कहा कि जिन लोगों पर कुर्बानी देने का आरोप है वे किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं बल्कि अपने घर के अन्दर बकरे की कुर्बानी दे रहे थे। 

कुर्बानी का बनाया वीडियो 

इस बीच शिकायतकर्ता इलाके में पहुंचकर छत पर चढ़ गए और अहमदी समुदाय के एक सदस्य को बकरे की कुर्बानी देते हुए देखा और घटना का वीडियो बना लिया। अहमदी समुदाय के कुछ अन्य सदस्य एक अन्य जानवर का मांस दूसरी जगह पर काट रहे थे। शिकायतकर्ताओं ने घटना का वीडियो बनाया और फैसलाबाद थाने में पांच लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी दण्ड संहिता (पीपीसी) के अनुच्छेद 298-सी के तहत शिकायत दर्ज करायी।

पुलिस ने दर्ज की एफआरआई 

उन्होंने पुलिस को दी गई तहरीर में लिखा है कि “इससे उनकी और अन्य मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।” इसलिए पुलिस “देश के मुसलमानों की मान्यताओं के अनुसार कार्रवाई करके दंडनीय अपराध करने पर” अहमदिया समुदाय के लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें। पुलिस के मुताबिक चक 89 रतन गांव में रहने वाले एक व्यक्ति की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए स्थानीय पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आपराधिक संहिता की धारा 298सी के तहत मामला दर्ज कर लिया है। 

अहमदिया मुसलमानों पर लगे हैं प्रतिबंध

पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 260(3) के अनुसार अहमदिया समुदाय खुद को मुसलमान की तरह पेश नहीं कर सकता है और न ही इस्लामी मजहब का पालन और प्रचार-प्रसार कर सकता है। पाकिस्तान की समाचार वेबसाइट ‘डॉन’ के अनुसार पाकिस्तानी के मजहबी मामलों के मंत्रालय ने इसी महीने गृहमंत्री को पत्र लिखकर अनुच्छेद 260(3) का कड़ाई से लागू कराने की मांग की थी। 

कौन हैं अहमदिया समुदाय 

बतादें कि अहमदिया समुदाय (जमाते अहमदिया मुस्लिमा) की स्थापना 19वीं सदी में अविभाजित भारत के पंजाब प्रान्त में मिर्जा गुलाम अहमद (1835-1908) द्वारा की गयी थी जो खुद को आखरी पैगम्बर नहीं घोषित कर चुका था जबकि क़ुरआन के अनुसार मोहम्मद साहब ही अंतिम पैगम्बर है। अहमदिया समुदाय गुलाम अहमदी को मेंहदी मानता है। मिर्जा गुलाम अहमद की विचारधारा को मानने वाले मुसलमानों को अहमदिया मुसलमान कहा जाता है। हालाकि मुसलमान इन्हे मुसलमान ही नहीं मानते क्यों की इन्होंने मिर्जा गुलाम अहमद को आखरी पैगम्बर मान कर क़ुरआन का इंकार कर दिया और कुरान का इंकार करने वाला मुसलमान कैसे हो सकता है. मिर्जा गुलाम अहमद का जन्म कादियान में हुआ था, इसलिए इस समुदाय को पाकिस्तानी में कादियानी मुसलमान भी कहा जाता है। ब्रिटेन में रहने वाले मिर्जा मसरूर अहमद इस समय अहमदिया समुदाय के खलीफा (रहनुमा) माने जाता हैं।

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