देश की सत्ता की बागडोर आरएसएस के हाथ में लेने के सवालों पर आया संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान

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नागपुर. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि देश चलाना सरकार का काम है और संघ को कभी सत्ता नहीं चाहिए. उन्होंने कहा, ‘जनता देश को चलाने की जिम्मेदारी कभी एक, तो कभी दूसरे को देती है… लेकिन अगर कभी जनता संघ को देश चलाने की जिम्मेदारी देगी, तो संघ देश चलाने की जिम्मेदारी नही लेगी क्योंकि देश चलाना सरकार का काम है और संघ को कभी सत्ता नहीं चाहिए.’

संघ प्रमुख ने कहा, ‘संघ संस्था नही, ऑफ द सोसायटी है… संघ अगर संगठन बनाएगा, तो सभी संगठनों को लेकर बनाएगा… सभी हिन्दू अपनी जवाबदारी पूरी करें, यह संघ की भूमिका है.’ उन्होंने कहा कि नेता कुछ नहीं करता है, बल्किन पहले समाज तैयार होता है और तब उसमें से नेता तैयार होता है. भागवत ने कहा कि कितना ही बड़ा नेता हो, लेकिन वह अकेले देश को ठीक नहीं कर सकता.

भागवत ने आगे कहा कि संगठन के नेता को स्टेटस के पीछे नही भागना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारे लोग दिखें कि नहीं, यह गूगल सर्च पर आना जरूरी नहीं है. भागवत ने कहा कि दुनिया की जानकारी रखने वालों को गांव के बगल की नदी के नाम की जानकारी नहीं होती. उन्होंने कहा, ‘संघ की आलोचक भी  भी संघ से ही होने चाहिए, इसके लिए उन्हें संघ के शाखा में आने की जरूरत नहीं है. हम बुद्धिनिष्ठ नहीं हैं, बल्कि अनुभवों से जो सीखते हैं, उसके अनुसार ही हम व्यवहार करते हैं.’

आपके शहर से (महाराष्ट्र)

पिछले माह महाराष्ट्र के एक मंदिर में एक धार्मिक प्रवचन कार्यक्रम में बोलने के दौरान आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था कि भारत अद्वितीय नैतिकता वाला एक ‘अमर’ राष्ट्र है जो हर जगह शांति लाता है और दुनिया के हर देश को एकजुट रखता है. स्वामी विवेकानंद का हवाला देते हुए भागवत ने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र का एक विशिष्ट उद्देश्य होता है. संघ प्रमुख ने कहा कि भारत में अद्वितीय ‘धर्मत्व’ है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना लोगों, समूहों और प्रकृति को मानव विकास के साथ उचित तरीके से रखता है.

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